मंज़िल की चाहत

बंद घरों के दरवाजे सब, कुछ खबर नहीं उठ निकले कब। सूरज भी पीछे रह जाए, सीने में जोश उमड़ आए। चल निकले वपस आन को, उस मंज़िल को पा जाने को।। जब तक हो अपना नाम नहीं, रुकना हो मेरा काम नहीं। जो कहा नहीं, कर जाने को, किस्मत से अब लड़े जाने को, … Continue reading मंज़िल की चाहत

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